अब अगर आपके पास बिना कन्फर्म ई-टिकट है तो हो सकता है कि आने वाले समय में आप ट्रेन में यात्रा कर पाएं.

Updated: June 2, 2018, 2:40 PM IST
अब अगर आपके पास वेटिंग ई-टिकट है तो हो सकता है कि आने वाले समय में आप ट्रेन में यात्रा कर पाएं. इसके अलावा रेलवे को एक प्लान बनाना पड़ेगा कि ताकि गलत नाम में टिकट बुक करने एजेंट और टाउट्स पर भी प्रतिबंध लगाया जा सके.
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने 2014 में विभास कुमार झा द्वारा दायर की गई एक याचिका में कहा गया था कि काउंटर टिकट धारकों की तरह वेटिंग वाले ई-टिकट वालों का टिकट नहीं कैंसिल होना चाहिए. बाद में इस आदेश के खिलाफ रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया.
अभी तक के नियम के अनुसार वेटिंग ई-टिकट रखने वालों को ट्रेन मे चढ़ने की इजाज़त नहीं होती थी जबकि काउंटर टिकट रखने वाले लोगों पर रोक नहीं लगाई जाती थी. इसलिए अगर कोई कन्फर्म टिकट वाला व्यक्ति नहीं आता था तो वह सीट इन्हें दे दी जाती थी.
जस्टिस मदन बी लोकुर की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को रद्द किए जाने की याचिका को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को रद्द करने का आदेश दिया क्योंकि मंत्रालय की ओर से कोई वकील नहीं आया.
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने 2014 में विभास कुमार झा द्वारा दायर की गई एक याचिका में कहा गया था कि काउंटर टिकट धारकों की तरह वेटिंग वाले ई-टिकट वालों का टिकट नहीं कैंसिल होना चाहिए. बाद में इस आदेश के खिलाफ रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया.
अभी तक के नियम के अनुसार वेटिंग ई-टिकट रखने वालों को ट्रेन मे चढ़ने की इजाज़त नहीं होती थी जबकि काउंटर टिकट रखने वाले लोगों पर रोक नहीं लगाई जाती थी. इसलिए अगर कोई कन्फर्म टिकट वाला व्यक्ति नहीं आता था तो वह सीट इन्हें दे दी जाती थी.
जस्टिस मदन बी लोकुर की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को रद्द किए जाने की याचिका को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को रद्द करने का आदेश दिया क्योंकि मंत्रालय की ओर से कोई वकील नहीं आया.
याचिका रद्द किए जाने के बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश के मुताबिक रेलवे को नियम बनाने पड़ेंगे ताकि दोनों तरह की टिकटों के बीच के अंतर को खत्म किया जा सके.
जुलाई 2014 में विभास कुमार झा द्वारा दायर एक याचिका पर दिए गए आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि रेलवे 6 महीने के अंदर सारे काम पूरे करे ताकि दोनों टिकटों के बीच की भेदभावपूर्ण स्थिति को खत्म किया जा सके.
हाईकोर्ट ने रेलवे को सुझाव देते हुए कहा कि एक विकल्प यह हो सकता है कि चार्ट अंतिम रूप से तैयार होते समय वेटिंग वाले ई-टिकट को कैंसिल न किया जाए ताकि वो भी यात्रा कर सकें. कोर्ट ने ये भी कहा कि इस तरह का कोई नियम नहीं है जो कि काउंटर टिकट वालों को ई-टिकट वालों की तुलना में वरीयता देता हो.
from Latest News देश News18 हिंदीजुलाई 2014 में विभास कुमार झा द्वारा दायर एक याचिका पर दिए गए आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि रेलवे 6 महीने के अंदर सारे काम पूरे करे ताकि दोनों टिकटों के बीच की भेदभावपूर्ण स्थिति को खत्म किया जा सके.
हाईकोर्ट ने रेलवे को सुझाव देते हुए कहा कि एक विकल्प यह हो सकता है कि चार्ट अंतिम रूप से तैयार होते समय वेटिंग वाले ई-टिकट को कैंसिल न किया जाए ताकि वो भी यात्रा कर सकें. कोर्ट ने ये भी कहा कि इस तरह का कोई नियम नहीं है जो कि काउंटर टिकट वालों को ई-टिकट वालों की तुलना में वरीयता देता हो.
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