सरकार को अस्थिर करने के लिए साजिश रच रहे हैं भारत के चर्च : विहिप

विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेन्द्र जैन ने कहा , ‘‘अब यह स्पष्ट हो गया है कि वेटिकन के इशारे पर भारत का चर्च वर्तमान सरकारों के विरोध में एक वातावरण बनाने का षड्यंत्र कर रहा है.’’



Updated: June 6, 2018, 8:24 PM IST
विश्व हिन्दू परिषद ने बुधवार को आरोप लगाया कि भारत के चर्चों ने वेटिकन के साथ मिलकर ‘‘एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की सुपारी’’ ली है . आरोप लगाया कि वे ‘‘कठपुतली’’ की तरह काम कर रहे हैं. विहिप के इस बयान से पहले दो आर्च बिशप केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर परोक्ष हमला बोल चुके हैं. दिल्ली के आर्च बिशप के पत्र के बाद गोवा और दमन के आर्च बिशप फादर फिलिप नेरी फेराओ ने सोमवार को चर्चों को एक पत्र लिखकर कहा था कि संविधान खतरे में है और  अधिकतर लोग असुरक्षा में जी रहे हैं.

इन पत्रों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेन्द्र जैन ने कहा , ‘‘अब यह स्पष्ट हो गया है कि वेटिकन के इशारे पर भारत का चर्च वर्तमान सरकारों के विरोध में एक वातावरण बनाने का षड्यंत्र कर रहा है.’’ जैन ने कहा , ‘‘इसके विपरीत चर्च के हमलावर राजनीतिक रूख और उसके धर्मान्तरण के एजेंडे के कारण भारतीय संविधान खतरे में है.’’

उन्होंने आरोप लगाया , ‘‘भारत का चर्च , एक बड़े षड्यंत्र के तहत , केंद्र व राज्यों में ऎसी सरकारें बनाने में जुट गया है जो वेटिकन की कठपुतली बन कर उसका स्वार्थ सिद्ध कर सकें.’’ विहिप नेता ने यह भी आरोप लगाया , ‘‘अवार्ड वापसी माफिया की तरह ये (भारत के चर्च) भी एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की सुपारी ले कर काम कर रहे हैं. ‘‘
जैन ने कहा कि वेटिकन ‘‘सम्पूर्ण विश्व में केवल हिंदू समाज को ही नहीं अपितु भारत को बदनाम करता है और भारत का चर्च उनकी कठपुतली बनकर अपने ही देश को बदनाम करने का अक्षम्य अपराध करता है. आपात - काल लगाने , कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार , 1984 में सिखों के कत्लेआम , चकमा बौद्धों पर चर्च के क्रूर जुल्मों से इनको कभी संविधान खतरे में नहीं दिखाई दिया.’’

उन्होंने सवाल किया कि चर्च इस तरह का व्यवहार तभी क्यों करता है जब बीजेपी नीत सरकार सत्ता में होती है. विहिप नेता ने कहा , ‘‘मोदीजी की सरकार के आते ही चर्च पर हमलों का झूठा प्रचार किया गया. सारे झूठ पकड़े जाने पर भी इन्होंने माफी मांगने की तमीज तक नहीं दिखाई.’’ राष्ट्रीय राजधानी के सभी चर्चों को लिखे एक विवादास्पद पत्र में दिल्ली के आर्चबिशप ने पिछले माह कहा था कि देश में ‘‘अशांत राजनीतिक माहौल’’ है जिससे लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को ‘ खतरा ’ है. आर्चबिशप अनिल कोउटो ने आठ मई को लिखे पत्र में दिल्ली के सभी पादरियों से अनुरोध किया कि वे 2019 के आम चुनाव से पहले ‘ देश के लिए प्रार्थना करें. ’ इन दोनों आर्चबिशपों द्वारा लिखे गये पत्रों पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया की.
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