राहुल गांधी पर बरसे अरुण जेटली- आखिर वह चीजों को कब समझेंगे

अरुण जेटली ने कहा, ‘आखिर वह (राहुल गांधी) कितना जानते हैं? वह चीजों को कब समझेंगे?’



Updated: June 6, 2018, 9:03 PM IST
भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मध्य प्रदेश में बुधवार को दिए भाषण को लेकर उनकी तीखी आलोचना की और उनकी समझ पर सवाल उठाया. जेटली ने कहा, ‘आखिर वह (राहुल गांधी) कितना जानते हैं? वह चीजों को कब समझेंगे?’

राहुल ने मंदसौर में किसानों की सभा को संबोधित किया था. कांग्रेस के नेता के भाषण के जवाब में जेटली ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘हर बार मैं राहुल गांधी के विचारों को सुनता हूं. संसद के भीतर और बाहर-दोनों जगह. मैं स्वयं से पूछता हूं कि आखिर वह कितना जानते हैं? वह कब समझेंगे? मध्य प्रदेश में दिए गए उनके भाषण को सुनते हुए इसके जवाब को लेकर मेरी जिज्ञासा और बढ़ गयी. क्या उन्हें अपर्याप्त जानकारी दी जाती है या वह अपने तथ्यों को लेकर कुछ ज्यादा ही उदार हैं.’

राहुल के इस आरोप पर कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 15 शीर्ष उद्योगपतियों के 2.5 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को माफ करने के आरोप पर जेटली ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष की यह बात तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत है. उन्होंने कहा कि सरकार ने उद्योगपतियों का एक रुपया भी माफ नहीं किया. तथ्य इसके ठीक उलट है.

गुर्दा प्रतिरोपण के बाद आराम कर रहे जेटली ने कहा, ‘जिन लोगों के ऊपर बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों का बकाया है, उन्हें दिवाला घोषित किया गया और उन्हें आईबीसी (ऋण शोधन एवं दिवाला संहिता) के जरिये उनकी कंपनी से बेदखल किया गया है. इस कानून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने लागू किया. इनमें ज्यादातर कर्ज संप्रग शासन के दौरान दिये गये.’
राहुल के इस टिप्पणी पर कि मोदी ने हीरा कारोबारियों को 35,000-35,000 करोड़ रुपये दिये जो अब देश छोड़कर चले गये, जेटली ने कहा कि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है. उन्होंने कहा कि बैंक धोखाधड़ी 2011 में शुरू हुई. उस समय संप्रग का शासन था. इसका पता राजग सरकार में चला. कांग्रेस अध्यक्ष हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी का जिक्र कर रहे थे. दोनों ने धोखाधड़ी वाले गारंटी पत्र के जरिये पंजाब नेशनल बैंक के साथ 13,000 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की.

राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि राजग सरकार केवल उद्योगपतियों को कर्ज दे रही है, किसानों को नहीं. वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि यह संप्रग सरकार खासकर उनके दूसरे कार्यकाल (संप्रग-दो) में था. उन्होंने कहा कि आज जो फंसे कर्ज (एनपीए) हैं, उसका बड़ा हिस्सा बैंकों द्वारा 2008-14 में दिया गया.

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