राष्ट्रपति बनने से पहले जिंदगी भर कांग्रेस के साथ रहे मुखर्जी गुरुवार को नागपुर में आरएसएस के कार्यकर्ताओं को संबोधित करने वाले है.

Updated: June 6, 2018, 7:37 PM IST
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नागपुर पहुंच गए. आरएसएस के संयुक्त महासचिव वी भगैया, नागपुर संघचालक राजेश लोया और सुनील देशपांडे ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया. इसी बीच देश यह जानने के लिए उत्सुक है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय में गुरुवार को आखिर क्या कहेंगे. अगर उनके आखिरी बार दिए गए भाषण पर गौर करें तो राष्ट्रपति के तौर पर 2017 में दिया गया उनका अंतिम भाषण उनके पांच दशकों के राजनीतिक कार्यकाल के दौरान के उनके विचारों और चिंताओं को दर्शाता है.
प्रणब ने अपने 2017 के इस संबोधन में कहा था, 'मैं आपके साथ कुछ सच्चाई साझा करना चाहता हूं जिसका मैंने इस दौरान अनुभव किया है. भारत की आत्मा बहुलवाद और सहिष्णुता में बसती है. भारत केवल एक भौगोलिक जगह नहीं है. यह अपने में इतिहास के विचार, दर्शनशास्त्र, बुद्धि, औद्योगिक बुद्धिमत्ता, शिल्प, नवाचार और अनुभवों को समेटे हुए है. हमारे समाज की बहुलता दशकों से विचारों का आकलन करने के बाद उत्पन्न हुई है.'
उन्होंने अपने करियर के इस अंतिम भाषण में कहा था, 'संस्कृति, विश्वास और भाषा की विभिन्नता भारत को विशेष बनाती है. हमें सहिष्णुता से मजबूती मिलती है. यह सदियों से हमारी सामूहिक चेतना का हिस्सा रहा है. सार्वजनिक जीवन में कई विचार होते हैं. हम उनसे सहमत हो सकते हैं, नहीं भी हो सकते हैं. लेकिन हम विविध विचारों के होने से इनकार नहीं कर सकते. अगर हम ऐसा करेंगे तो अपनी विचार प्रक्रिया के एक मूल तत्व को हम गंवा देंगे.'
राष्ट्रपति बनने से पहले जिंदगी भर कांग्रेस के साथ रहे मुखर्जी गुरुवार को नागपुर में आरएसएस के कार्यकर्ताओं को संबोधित करने वाले है. आरएसएस के मंच पर यह उनका पहला भाषण होगा जिसकी वह अतीत में एक से अधिक बार आलोचना कर चुके हैं. शायद इसीलिए, उनके द्वारा आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार करने के बाद विवाद पैदा हो गया.
प्रणब ने अपने 2017 के इस संबोधन में कहा था, 'मैं आपके साथ कुछ सच्चाई साझा करना चाहता हूं जिसका मैंने इस दौरान अनुभव किया है. भारत की आत्मा बहुलवाद और सहिष्णुता में बसती है. भारत केवल एक भौगोलिक जगह नहीं है. यह अपने में इतिहास के विचार, दर्शनशास्त्र, बुद्धि, औद्योगिक बुद्धिमत्ता, शिल्प, नवाचार और अनुभवों को समेटे हुए है. हमारे समाज की बहुलता दशकों से विचारों का आकलन करने के बाद उत्पन्न हुई है.'
उन्होंने अपने करियर के इस अंतिम भाषण में कहा था, 'संस्कृति, विश्वास और भाषा की विभिन्नता भारत को विशेष बनाती है. हमें सहिष्णुता से मजबूती मिलती है. यह सदियों से हमारी सामूहिक चेतना का हिस्सा रहा है. सार्वजनिक जीवन में कई विचार होते हैं. हम उनसे सहमत हो सकते हैं, नहीं भी हो सकते हैं. लेकिन हम विविध विचारों के होने से इनकार नहीं कर सकते. अगर हम ऐसा करेंगे तो अपनी विचार प्रक्रिया के एक मूल तत्व को हम गंवा देंगे.'
राष्ट्रपति बनने से पहले जिंदगी भर कांग्रेस के साथ रहे मुखर्जी गुरुवार को नागपुर में आरएसएस के कार्यकर्ताओं को संबोधित करने वाले है. आरएसएस के मंच पर यह उनका पहला भाषण होगा जिसकी वह अतीत में एक से अधिक बार आलोचना कर चुके हैं. शायद इसीलिए, उनके द्वारा आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार करने के बाद विवाद पैदा हो गया.
वह नागपुर में क्या बोलने वाले हैं, इसका सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है. उन्होंने कहा है कि वह जो भी कहेंगे, उसके बारे में पता उनके संबोधन के बाद ही चल पाएगा.
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